विशाल हृदय सक्षमता की प्रथम मूर्ति पूज्य 'बाबूजी' का शिक्षा से जुड़ाव एक ऐसा स्वप्न जिसे वे अंतर मन में छूटकर कहते थे कि इस क्षेत्र के आस-पास को निवासित समस्त बालक एवं बालिकाओं में शिक्षा की अलख जगाने हेतु एक ऐसा शैक्षणिक केंद्र हो जिसमें वह अपने भविष्य को निखारकर आत्मनिर्भर बन सके। वे महान व्यक्तित्व जिन्होंने अपने दीर्घ एवं गहन अनुभव से यह महसूस किया कि यदि हर घर से एक बेटा या बेटी पढ़ेगी तो अनेक पीढ़ियां शिक्षित होगी। वे कहीं भी दबेंगे नहीं, हारेंगे नहीं, स्वयं को सक्षम सफल बनाते हुए एक नव समाज की स्थापना करेंगे।
उनके इसी दिव्य स्वप्न को साकार करने का पवित्र कर्तव्य आदरणीय श्री रविशंकर सिंह पप्पू भैया ने पूर्ण करते हुए सहतवार क्षेत्र को अत्याधुनिक शिक्षा से जुड़ा एक ऐसा शिक्षण संस्थान समर्पित किया जिसे देखते ही लगता है कि मानो सरस्वती वाणी को ऊर्जास्वित करता एक ऐसा अद्भुत, अनुपम, अद्वितीय शैक्षिक संस्थान पहले नहीं देखा। इन पावन व उच्च विचारों के धनी स्व० उमाशंकर सिंह बाबूजी एवं आदरणीय रविशंकर सिंह 'पप्पू भैया' की शोभा जितने भी शब्दों में की जाए वहां शब्दों की अल्पता प्रतीत होने लगती है।
स्व० उमाशंकर सिंह जी
संस्थापक/प्रबन्धक